चातुर्मास: राष्ट्रसंत ललितप्रभजी से समझिए कि दुआओं का नेटवर्क कैसे काम करता है..भक्ति की शक्ति और प्रार्थना का चमत्कार’ को इस तरह समझिए

चातुर्मास: राष्ट्रसंत ललितप्रभजी से समझिए कि दुआओं का नेटवर्क कैसे काम करता है..भक्ति की शक्ति और प्रार्थना का चमत्कार’ को इस तरह समझिए

बिगुल
रायपुर. राष्ट्रसंत ललितप्रभजी का संदेश है कि मेरे कहे इस वाक्य को जिंदगी में हमेशा याद रखना, जिंदगी में अगर ले सको तो किसी की दुआएं ले लेना, मगर भूल-चूक कर भी कभी किसी की बददुआ मत लेना। जिंदगीभर के लिए इस मंत्र को अपना लो कि- दुआ कभी किसी का साथ नहीं छोड़ती और उससे बड़ा सच ये है- बददुआ कभी किसी का पीछा नहीं छोड़ती। आज नहीं तो कल दुआ आपके बुरे वक्त में काम आती है तो बददुआ आदमी की जिंदगी में बुरा वक्त लाकर खड़ा कर देती है। मैं तो कहता हूं अगर आपके घर में कोई मजदूर काम करता है, उसका पसीना सूखे उससे पहले उसकी जेब में उसकी मेहनत का पैसा डाल देना। क्योंकि दुआ जितना काम करती है, उससे कहीं ज्यादा बददुआ काम किया करती है। जहां दुनिया की कोई दौलत काम नहीं करती, वहां ईश्वर की तरह शक्ति बनकर दुआ की दौलत काम करती है। ’’

ये प्रेरक उद्गार राष्ट्रसंत महोपाध्याय श्रीललितप्रभ सागरजी महाराज ने आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में जारी दिव्य सत्संग जीने की कला के अंतर्गत धर्म सप्ताह के पंचम दिवस शुक्रवार को ‘कैसे कमाएं जीवन में दुआओं की दौलत’ विषय पर व्यक्त किए। नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का, सदा न रहा है सदा न रहेगा ये जमाना किसी का... इस प्रेरक भजन से दिव्य सत्संग का शुभारंभ करते हुए संतप्रवर ने कहा कि संतश्री ने आगे कहा कि गजब की होती है ये दुआओं की दौलत। जब सूटकेस, हीरे और जवाहरात की दौलत भी बेकार हो जाती है तब भी अगर कोई आदमी किसी दुर्घटना में बचता है तो उसे बचाने वाली दौलत का नाम है दुआ की दौलत। ये दौलत जिंदगी में या तो कभी मुसीबत आने नहीं देती और अगर जब मुसीबत आ जाए तो दुनिया की कोई दौलत काम नहीं करती, तब दुआओं की दौलत काम करती है। इसीलिए जिंदगी में अगर सबसे ज्यादा किसी दौलत को आदमी को बटोरना चाहिए तो वह है दुआओं की दौलत। याद रखना मारने वाले के दो हाथ होते हैं और बचाने वाले के हजार हाथ होते हैं। हाथ जोड़कर उस ईश्वर के सामने दुआ की दौलत मांग लेना। एक अमीर आदमी अपने इकलौते बेटे को बचाने के लिए दुनिया की दौलत हाथ में लिए खड़े रहता है, महंगे से महंगे डॉक्टर कर लेता है और जब डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से बाहर आते हैं तब वे कहते हैं हमने तो पूरी कोशिश कर लें अब तो बस आप लोग दुआ करो। इसीलिए मैं आपको बताना चाहता हूं, जहां पर डॉक्टर की दवा काम नहीं करती वहां पर भी दी हुई दुआएं काम करती है।

जहां कोई नेटवर्क काम नहीं करता वहां काम करता है दुआओं का नेटवर्क
संतप्रवर ने कहा कि जिंदगी में और कोई कमाई करो न करो, एक कमाई जरूर कर लेना, कभी ऐसी समस्या खड़ी हो जाती है जब सारा धन मिलकर भी उस एक समस्या का समाधान नहीं कर पाता, अगर आपने कभी दुआ की दौलत बटोरी है तब अचानक कोई ऐसा व्यक्ति आया जिसने आपकी सारी समस्या का समाधान कर दिया। जिदंगी के उस वक्त जब आपके पास आपका-अपना कोई नहीं होगा, और आपका कोई नेटवर्क वहां काम न करे तब आपके पास रखा हुआ दुआओं का नेटवर्क जरूर काम आ जाएगा।

संकल्प लेवें- आज से मैं वहीं काम करूंगा जो दुनिया को अच्छा लगे
संतश्री ने आह्वान कर कहा कि हम यह संकल्प ले लेवें कि आज से मैं दुनिया में वही  काम करुंगा जो दुनिया को अच्छा लगे। मैं आज से वही वचन बोलुंगा जो मेरे परिवार, पड़ोसी, संबंधी सभी को अच्छा लगे। मैं समाज में भी जाउंगा तब ऐसे शब्द कभी नहीं बोलुंगा, जिससे किसी के मन को पीड़ा पहुंच जाये। यदि आज आप किसी बड़े पद पर हैं तो समाज के किसी एक व्यक्ति को भी ऐसे टेढ़े शब्द ना बोलना, जिससे किसी को बुरा लगे। संघपति वो नहीं होता जो संघ बनाए, संघपति वो होता है जो संघ को अपना पति मान लेता है। समाज का अध्यक्ष वो नहीं होता जो समाज में सबसे बड़ा हो जाता है, समाज का अध्यक्ष वो होता है जो समाज को अपने से बड़ा मानने लग जाता है। इसीलिए अपने बड़ेपन का कभी-भी अभिमान मत करना।
 
दुआ की दौलत कमाने इन छोटे-छोटे मंत्रों का करें पालन
संतश्री ने कहा- जिंदगी में दुआ की दौलत कमाने के लिए आज मैं आपको छोटे-छोटे मंत्र दे रहा है। इन्हें अपनी जिंदगी में लागू कर लेना।  ये तीनों मंत्र पारसनाथजी के प से शुरू होते हैं। जीवन में दुआ की दौलत बटोरने के लिए पहला काम करो और वो है- परोपकार करो। दूसरा मंत्र है उसका तरीका है- घर के बड़े-बुजुर्गों को सुबह उठकर घुटने टिका कर प्रणाम करो। दुनिया में चार का नेटवर्क बड़ा तेज होता है- एक प्रभुजी, दूसरा गुरुजी, तीसरा पिताजी और चौथा माताजी। तीसरा मंत्र है- दुआ की दौलत को पाने के लिए रामबाण की तरह यह कार्य करेगा, वह है- जब भी करो प्रभुजी की प्रार्थना जरूर करो।
 
और कोई नहीं: डॉ. मुनिश्री शांतिप्रियजी
धर्मसभा के पूर्वार्ध में डॉ. मुनिश्री शांतिप्रिय सागरजी ने कहा कि दुनिया में सभी सुख के साथी होते हैं दुख का साथी कोई नहीं होना चाहता। आप अपने जीवन में धन कमाने के लिए जो पाप किया करते हैं, उस पाप फल के हिस्सेदार और कोई नहीं होंगे, उनका भुगतान केवल आप को ही करना होगा। क्योंकि कर्म सिद्धांत का सूत्र है- कर्म हमेशा कर्ता का अनुगमन किया करता है। इंसान सबकी आंखों में धूल झोंक सकता है पर कर्म की आंखों में धूल नहीं झोंक सकता। इसीलिए हमें कर्म करते समय हमेशा सजग-सावधान रहना चाहिए। दुनिया में किसी से डरने की जरूरत नहीं, यदि डरना ही है तो पाप कर्म करने से डरें। आदमी कर्म करने में स्वतंत्र है लेकिन उस कर्म उदय में आने पर उसका भुगतान करने में वह परतंत्र हो जाता है। किए हुए कर्मों को भोगे बिना उनसे छुटकारा नहीं मिलता। आज से हम सब यह संकल्प लेवें कि कभी भी पाप कर्मों का बंधन नहीं करेंगे और पूर्व के कर्मों को काटने हम सदा सन्मार्ग पर चलते रहेंगे। जो कर्मों को जीत लेता है, वही महावीर कहलाता है।
 
अतिथियों को भेंट में मिले ज्ञान पुष्प
श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, ट्रस्टीगण तिलोकचंद बरड़िया, राजेंद्र गोलछा व उज्जवल झाबक ने संयुक्त जानकारी देते बताया कि आज दिव्य सत्संग का शुभारंभ अतिथिगण सांसद सुनील सोनी, श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, सुरेश कांकरिया, संतोष दुग्गड़, सुलोचना सराफ, संगीता चोपड़ा एवं गौतमचंद बोथरा द्वारा ज्ञान का दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अतिथियों को श्रद्धेय संतश्री के हस्ते ज्ञानपुष्प स्वरूप धार्मिक साहित्य भेंट किये गये। अतिथि सत्कार दिव्य चातुर्मास समिति के स्वागताध्यक्ष कमल भंसाली, पीआरओ समिति से विमल गोलछा व मनोज कोठारी द्वारा किया गया। सूचना सत्र का संचालन चातुर्मास समिति के महासचिव पारस पारख ने किया।
 
तपस्वियों का हुआ बहुमान
श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं श्रीदिव्य चातुर्मास समिति की ओर से आज धर्मसभा में 11 उपवास की तपस्विनी श्रीमती नम्रता कांकरिया धर्मपत्नी सुमित कांकरिया एवं श्रीमती गौरी कांकरिया धर्मपत्नी संयम कांकरिया सहित 9 उपवास के तपस्वी माणकचंद चोपड़ा, राजेंद्र गोटी का बहुमान किया गया।