बड़ी खबर: केन्द्र ने छत्तीसगढ़ का प्रधानमंत्री आवास फण्ड रोका..साथ में दो और राज्य शामिल..भेजी जायेगी जांच समिति..रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

बड़ी खबर: केन्द्र ने छत्तीसगढ़ का प्रधानमंत्री आवास फण्ड रोका..साथ में दो और राज्य शामिल..भेजी जायेगी जांच समिति..रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

बिगुल
नईदिल्ली. केन्द्रीय ग्रामीण एवं विकास मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सहित दो अन्य राज्य ओडिशा और बंगाल का प्रधानमंत्री आवास फण्ड 823 करोड़ इस साल का रोक दिया है. तीनों ही राज्यों में परीक्षण के बाद कोई फैसला होगा.

मंत्रालय के मुताबिक छत्तीसगढ़ सहित दो अन्य राज्य ओडिशा और बंगाल में योजना में भारी अनियमितताओं की शिकायत मिली थी. मंत्रालय ने जिन एजेंसियों से सर्वे कराया था, उनकी रिपोर्ट से पता चला है कि 60 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों के खाते बदल दिए गए क्योंकि आर्थिक राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है. इसका मतलब यह है कि पहचाने गए लाभार्थियों को बैंक खातों में राशि नहीं मिली. पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा यही अनियमितताएं सामने आई हैं.

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि उड़ीसा में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं. यहां के केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भी इसकी शिकायत की थी जिसके बाद वहां जांच कराई गइ्र. मालूम चला कि उड़ीसा में भी योजना के लाभार्थियों के खाते बदल दिए गए जिससे यह साफ नही हो सका कि राशि किसके खाते में गई है और कौन लाभार्थी है. यह भी पता चला कि जिन्होंने इस योजना का लाभ लेकर अपना मकान बनाया, वे असल में कौन हैं.

मंत्रालय ने बताया कि उड़ीसा को अब तक एक करोड़ 83 लाख मकान स्वीकृत किए गए थे जिसमें 1.69 करोड मकान कंपलीट हो गए हैं. इतनी तेजी से मकान कैसे बना लिए गए.

उन्होंने राज्य को अयोग्य लाभार्थियों की छंटनी करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा में पीएमएय (ग्रामीण) के तहत 1.83 लाख़ घरों को मंजूरी दी गई है - अब तक 1.69 घर पूरा हो चुका है। मंत्रालय ने अब राज्य को निर्देश दिया है कि वे अगले 12 महीनों में 1.26 लाख घर पूरा करें। ओडिशा सरकार को तीन महीने के घरों के भीतर पूरा करने के लिए भी कहा है, जिसमें एक वर्ष से अधिक की देरी से हो चुकी है।

कई राज्यों ने योजना का नाम और लोगो बदल दिया है और राज्य अपनी योजनाओं के रूप में केंद्रीय योजनाओं को पारित कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल ने हाउसिंग स्कीम का नाम बदलकर बांगला आवस योजना कर दिया है और इसके तहत केंद्रीय धन का उपयोग कर रहा था। ओडिशा और पश्चिम बंगाल ने योजना के दिशानिर्देशों को याद करते हुए योजना के लोगो को बदल दिया है.

ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 1.5 लाख घरों को मंजूरी दी गई है। यहां भी योजना के कार्यान्वयन में कई अनियमितताओं का पता चला है. छत्तीसगढ़ में तो एक भी मकान का पूरा नही हो सका क्योंकि राज्य सरकार ने अपना 40 प्रतिशत का योगदान ही नही दिया.

जानते चलें कि प्रधानमंत्री आवास योजना, भागीदारी प्रणाली पर केंद्रित है. केन्द्र सरकार इसके लिए 60 प्रतिशत राशि देती है जबकि 40 प्रतिशत राज्य को देना होता है. छत्तीसगढ़ ने यह राशि नही दी है इसलिए मकानों की योजना शुरू नही हो सकी.